प्रार्थना

राधा कृष्ण के नाम से
मीरा जिये हरि नाम
गौरा जिये शिव नाम से
मैं जीयु तेरे नाम

राधा विरह विष पी रही
मीरा करे विष पान
गौरा स्तुति कर रही
मैं लेउ तेरा नाम

प्रेम की आंधी चल पड़ी
हुआ है सब कुछ ढेर
हाथ जोड़ तेरे सामने
खड़ी मैं छोड़ सब डेरे

गंगा जमुना बह चली
बहा है अश्रु नीर
तू जाने बस, जाने कौन
मेरे मन की पीर।

नाम तेरा रटती चलूं

सुबह से लेकर शाम

रोम – रोम में बस रहे 

है मेरे प्रभु श्याम

जय श्री श्याम 

जय श्री राधे कृष्णा

ॐ नमः शिवाय 🙏

बाबा सब पर अपनी कृपा बनाये रखे

इंतेहा प्यार की #3

प्रेक्षा ने क्लास में एंट्री की तो जीविका सामने ही खड़ी हुई दिखाई दी। प्रेक्षा ने रिद्धि मैम से अंदर आने की परमिशन ली – ” मैम, मे आई कम इन “

रिद्धि मैम प्रेक्षा की ज्योग्राफी की टीचर थी। 

रिद्धि मैम ने अंदर आने का इशारा किया। प्रेक्षा अंदर आकर जीविका के पास खड़ी हो गयी। जीविका और प्रेक्षा मैम की तरफ देखने लगे। तभी अचानक अभिनव हाँफता हुआ दरवाजे के पास पहुँचा और बोला – “मैम, हम आ जाए अंदर। “

मैम ने कहा – ” आ जाओ, जल्दी। “

अभिनव अंदर आकर प्रेक्षा और जीविका के पास खड़े अपने एक दोस्त के पास खड़ा हो गया। थोड़ी ही देर में एक – एक करके उसके सभी दोस्त आने लगे और दरवाजे पर खड़े होकर एक दूसरे को देखकर मुस्कुराते हुए एक साथ बोले – “मैम, अंदर आ जाए। “

रिद्धि मैम हैरानी से उन्हे देख रही थी। फिर मैम ने गुस्से में जवाब दिया – ” अभी तो आपके साथ के दो चार बरातीं नहीं आये होंगे, उनका भी इंतज़ार कर लो।” 

मैम की बात सुनकर सभी बच्चे हँसने लगे। फिर मैम ने गुस्से से कहा – ” कीप क्वाएइट “

सब बच्चे चुप हो गए। 

तभी दरवाजे पर खड़े सभी लड़को ने एक साथ कहा -” नहीं मैम, बस हो गये बरातीं पूरे। “

पूरी क्लास फिर जोर – जोर से हँसने लगी। तभी मैम ने गुस्से से कहा -” चलो अंदर, बद्तमीज़। “

सब अंदर आकर अभिनव के पास खड़े हो गए। 

तभी मैम ने सभी ग्रुप्स के टीम मैंबर्स के नाम बताना शुरू किया। रिद्धि मैम ने कहा – “हर ग्रुप में तीन मैंबर्स होंगे कम से कम। “

फिर धीरे – धीरे मैम ने सभी ग्रुप्स का नाम बताना शुरू किया। 

सब मैम को ध्यान से सुन रहे थे। जिसका नाम आ जाता था वो अपने ग्रुप मैंबर्स का नाम नोट कर लेता था। पांच ग्रुप्स के नाम बोलने के बाद मैम ने सिक्स्थ ग्रुप का नाम बताते हुए कहा -” सिक्स्थ ग्रुप में है जीविका, राजेश, और अनामिका। “

जीविका का नाम सुनते ही प्रेक्षा अपने नाम का इंतज़ार कर रही थी, पर मैम ने जीविका को उससे अलग ग्रुप में डाला था। ये सुनते ही वह उदास हो गयी। प्रेक्षा नजरे नीचे करके खड़ी हो गयी। जब मैम ने अगले ग्रुप का नाम बताते हुए प्रेक्षा का नाम लिया , तो जीविका ने प्रेक्षा को कहा – ” सुन तेरा नाम आ गया। “

अभी रिद्धि मैम ने प्रेक्षा का नाम ही बोला था की दरवाजे पर रेजिस्टर लेकर एक सर आ गये। मैम रेजिस्टर पर साइन् कर रही थी और जीविका, प्रेक्षा और अभिनव तीनों ही मैम को गौर से देख रहे थे। 

जैसे ही सर क्लास से गए, तीनों ही एक साथ चिल्लाये – ” मैम आगे ।” फिर एक दूसरे की शक्ल देखने लगे। 

“क्या आगे ” – मैम ने कहा। 

“मैम आप ग्रुप के मैंबर्स के नाम बता रही थी। प्रेक्षा का नाम बोला था, तो अब आगे बाकी मैंबर्स के नाम बताओ ।” – जीविका ने कहा। 

“ओह्ह! हाँ, प्रेक्षा के साथ ग्रुप में हैं – राजीव और अभिनव। ” – मैम ने जवाब दिया।

जहाँ ये सुनकर प्रेक्षा और अभिनव दोनों ही आश्चर्यचकित थे। वहीं जीविका और अभिनव के सभी दोस्त मुस्कुरा रहे थे। लेकिन प्रेक्षा और अभिनव तो कभी मैम को देख रहे थे तो कभी एक दूसरे को। प्रेक्षा  ने सोचा वो क्लास के बाद मैम को कह देगी कि उसे अभिनव के साथ एक ग्रुप में नहीं होना। लेकिन यहाँ तो उल्टा ही हो गया। अभिनव चिल्लाया – ” एक्सक्युज़ मी मैम, हमें आपसे कुछ बात कहनी है। “

“हाँ बोलो” – मैम ने कहा। 

“हमें इस ग्रुप में नहीं रहना, हमें तो आप किसी और ग्रुप में डाल दो। ” – अभिनव ने कहा। 

“क्यों नहीं रहना, कोई कारण तो बताओ। ” – रिद्धि मैम ने अभिनव से पूछा। 

अभिनव ने कहा – ” वो क्या है ना मैम, हमें…. अपने दोस्तों के ग्रुप में जाना है। “

मैम ने अभिनव को डांटते हुए कहा -” क्या तुम कोई छोटे बच्चे हो, ये कोई बहाना हुआ। कोई और कारण हो तो बताओ। वरना ग्रुप चेंज नहीं होगा। “

प्रेक्षा जानती थी कि अभिनव ये सब उसी की वजह से कर रहा है। और वो ये भी जान गयी थी कि मैम ग्रुप चेंज करने के लिए बिल्कुल नहीं मानेगी। इसीलिए उसने मैम से कुछ भी ना कहने का फैसला किया। 

“अच्छा, चौथे लेक्चर से लास्ट लेक्चर तक करना होगा प्रोजेक्ट पूरा। तो, प्लीज़ सब ग्रुप मैंबर्स मिलकर काम करें। ” – मैम ने सभी को समझाया। 

“अगर इतने समय में प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ तो मैम” – राजीव ने पूछा। राजीव क्लास का सबसे इंटेलिजेंट लड़का था। वह स्पोर्ट्स में भी अच्छा था। सभी टीचर्स उसे पसंद करते थे। 

रिद्धि मैम ने जवाब दिया – ” देखो राजीव, वैसे तो इतने समय में प्रोजेक्ट होना ही चाहिए क्योंकि मार्क्स आज की परफॉर्मेंस के हिसाब से ही मिलेंगे।, लेकिन फिर भी अगर नहीं हुआ और आप पूरा करना चाहें तो सभी टीम मैंबर्स को लास्ट लेक्चर के बाद रुक कर उसे पूरा करना होगा। उसमें आपको फाइव मार्क्स और प्रोजेक्ट पूरा करने के मिल जायेंगे। उससे ज्यादा नहीं।” 

रिद्धि मैम ने अपनी किताब उठाते हुए कहा – ” और हाँ, एक बात और नेक्स्ट डे आपको ये प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए सिर्फ आधा घंटा ही एक्स्ट्रा मिलेगा। ” 

“ओह्ह! ओके मैम” – राजीव ने कहा। 

पहले लेक्चर की बेल लगी। मैम क्लास से बाहर भी नहीं गयी होगी कि सभी ग्रुप मैंबर्स अपने प्रोजेक्ट की चर्चा में लग गए। जहाँ एक तरफ सभी ग्रुप अपने प्रोजेक्ट के बारे में चर्चा कर रहे थे। प्रेक्षा और अभिनव एक दूसरे को देख भी नहीं रहे थे।

राजीव ने प्रेक्षा और अभिनव से पूछा – “क्या तुम दोनों ने अपने प्रोजेक्ट की थीम के बारे में कुछ सोचा है। ” दोनों ने एक साथ बोला। अभिनव ने कहा -” नहीं ” तो प्रेक्षा ने कहा – ” हाँ “, फिर दोनों एक दूसरे को गुस्से से देखने लगे। राजीव दोनों के जवाब सुनकर हँसने लगा और बोला – ” ठीक है प्रेक्षा, मुझे तीसरे लेक्चर में वो थीम बताना ताकि प्रोजेक्ट के बारे में डिस्कस कर ले। ” फिर राजीव ने अभिनव को देखा और कहा – ” तुम भी मिल लेना तभी, तुम भी अपने पॉइंट ऑफ व्यूज़ रख देना। ” 

“नहीं, हम नहीं मिल पाएंगे। आप लोग ही विचार – विमर्श कर लेना।” – अभिनव ने जवाब दिया। 

“अच्छा, कोई बात नहीं ” – राजीव ने कहा और प्रेक्षा की तरफ देखते हुए बोला – ” ठीक है फिर प्रेक्षा, तुम अपनी थीम का आईडिया मेरे साथ ही शेयर कर लेना। ” फिर राजीव सामने देखने लगा। इतेहास की मैम आ गयी और सब पढाई में लग गए। आज तो टीचर भी हैरान थी सबको पढाई में डूबे देख। लेकिन वास्तव में तो सब अपने – अपने ग्रुप में बैठ कर प्रोजेक्ट के बारे में बातचीत कर रहे थे। 

क्लास के बाद जब टीचर बाहर गयी तो सभी जोरों – शोरो से अपने प्रोजेक्ट के बारे में डिस्कस करने लगे क्योंकि उन्हें पता था आज रणवीर सर अब्सेंट् थे। इसीलिए ये वाला लेक्चर फ्री था। जीविका अपने ग्रुप मैंबर्स के पास बैठ गया। राजीव और प्रेक्षा प्रोजेक्ट के बारे में डिस्कस कर रहे थे । अभिनव ने पीछे मुड़कर दोनों को देखा। प्रेक्षा राजीव को अपने थीम समझा रही थी। अभिनव उन्हें बार – बार मुड़ कर देख रहा था। वो बहुत बेचैन हो रहा था। उसने मना तो कर दिया था। पर वो अब वहाँ जाना चाहता था। पर वो ये समझ नहीं पा रहा था कि क्यों वो प्रेक्षा की तरफ खिंचा चला जा रहा था। 

10 मिनट बाद अभिनव राजीव और प्रेक्षा के पास गया। और राजीव से बोला -” राजीव आपको कोई बाहर ढूंढ रहा था। “

इससे पहले अभिनव आगे कुछ बोलता। राजीव बोला – ” शायद A. M सर बुला रहे है तो प्रेक्षा बाकी चीज़े तुम और अभिनव डिस्कस कर लो, मैं अभी आया। ” 

राजीव क्लास से बाहर चला गया। अभिनव प्रेक्षा के पास बैठ गया। दोनों एक दम शांत बैठे थे। तभी अभिनव ने प्रेक्षा से पूछा – ” वैसे क्या थीम सोची है आपने “

प्रेक्षा ने कहा – ” सोइल् से रिलेटेड है, वी कैन प्रेपेयर प्रोजेक्ट ऑन डिफ्फरेंट काएंड् ऑफ सोइल् ” 

अभिनव ने मुस्कुराते हुए हाँ में गर्दन हिलायी। दोनों साथ में बैठे तो थे पर बात कुछ नहीं हो रही थी। अभिनव कुछ कहने के लिए प्रेक्षा की तरफ मुड़ा ही था कि राजीव आ गया। 

“यार, सर ने तो नहीं बुलाया। हाँ, पर सर बहुत खुश थे क्योंकि मैं खुद से चला गया था। पर वो लड़का कौन था? ” – राजीव ने बैठते हुए पूछा। 

“हम तो जानते नहीं” – अभिनव ने राजीव की तरफ देखकर कहा। 

“छोड़ो, चलो अपने प्रोजेक्ट पर फोकस करते है ” – राजीव ने कहा और प्रेक्षा की नोटबुक में देखने लगा। 

अभिनव भी प्रेक्षा की तरफ देखने के लिए मुड़ा तो देखा की प्रेक्षा उसे शक भरी निगाहों से देख रही थी। तभी अभिनव ने कहा – ” चलिए करते है प्रोजेक्ट के बारे में बात।  

इससे पहले की प्रेक्षा कुछ बोलती, बेल लग गयी। सभी स्टूडेंट्स रिद्धि मैम के पास जाने लगे। 

“मैम कहाँ है? ” – एक स्टूडेंट ने पूछा। 

“ऑडिटोरियम में बुलाया है मैम ने सबको, अभी स्टाफ रूम में बोला था मुझे” – राजीव ने सबको बताया और सब ऑडिटोरियम की तरफ चल दिये। अभिनव ने राजीव को देखते हुए कहा – ” तो फिर हमे ऑडिटोरियम में चलना चाहिए, राइट। “

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इंतेहा प्यार की #2

अगले दिन जब प्रेक्षा कॉलेज में आई तो जीविका उसे गेट पर ही मिल गयी। जीविका ने प्रेक्षा से पूछा – ” क्या जवाब देगी, क्या उससे दोस्ती करेगी? कुछ सोचा भी है या नहीं, बता ना यार” । 

” पहले चुप तो हो, तू बोलेगी तो मैं कैसे बोलूँगी” – प्रेक्षा ने कहा। 

जीविका चुपचाप उसके साथ – साथ चलने लगी। प्रेक्षा चुप रही। 

कुछ देर बाद प्रेक्षा रूकी और जीविका को कहा ” मैं उससे दोस्ती नहीं कर सकती। मैं उसे आज साफ़ मना कर दूँगी और कह दूँगी मुझसे दूर रहे। “

जीविका ने कहा – ” जैसा तुझे सही लगे, पर दोस्ती करना गलत नहीं है।

प्रेक्षा चुप थी। जीविका समझ गयी कि वो परेशान है। इसीलिए उसने उसका मूड ठीक करने के लिए कहा –  ” सही है यार, कह देना उसको तुझे उससे दोस्ती नहीं करनी। बाकी बाद में देख लेंगे। “

” मैंने कहा ना मुझे दोस्ती नहीं करनी। ” – प्रेक्षा ने चिल्लाते हुए कहा। जीविका ने कहा “ओके ओके, ठीक है बाबा जो करना है वो कर बस परेशान मत हो। “

वो दोनों चुपचाप क्लास की तरफ बढ़ने लगे, क्लास में पहुँचने पर उन्होंने देखा कि पूरी क्लास भरी थी, कहीं जगह नहीं थी। बस एक बैंच को छोड़कर जिसके आगे वाले बैंच पर अभिनव बैठा था।

वो दोनों  उस बैंच की तरफ बढ़ी प्रेक्षा अपनी नजरें अभिनव से बचा रहीे थी, ताकि वो उसके सवाल को नजरादाज़ कर सके।

जैसे ही प्रेक्षा उस बैंच पर बैठी, अभिनव ने जीविका को रोक दिया और बिना समय गवाए खुद उस बैंच पर जाकर बैठ गया, प्रेक्षा उसे गुस्से से घूरने लगी। जीविका उसे समझाने की कोशिश कर रही थी – कि प्रेक्षा आज परेशान है और वो उसे और परेशान ना करे, पर अभिनव उसकी बात समझने के लिए तैयार ही नहीं था।

” देखो अभि मुझे इस जगह पर बैठने दो, तुम वापस अपनी जगह पर जाओ” – जीविका ने कहा।

“क्या इस जगह पर आपका नाम लिखा है। ” – अभिनव ने जीविका से ताना मारते हुए कहा।

” देखो आज प्रेक्षा का मूड बहुत खराब है, तुम जाओ अपनी जगह पर, प्लीज़” – जीविका ने विनती करते हुए कहा।

पर अभिनव तो जैसे सोच कर आया था, उसने कहा, – ” मैं आपकी दोस्त से कुछ नहीं कहूंगा । बस एक सवाल का जवाब चाहिए मुझे, वही जवाब लेने आया हूँ। फिर चला जाऊंगा। “

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Extinct humanity #2

Today’s era is selfish. People are so selfish that they can’t see people around them are human. They just treat them according to their class. What class? When you don’t know how to respect people. You are not human yourself. It’s not for a single person. It’s for everyone. I wish for a world, where people treat each other respectfully. But, as we know it’s not possible. As, we have our own eye to see people around us. So, we treat them the way we want to. It’s hurts when kids works and beg in the age of learning. The time when they should go to school. They used to beg for food and money. And I saw some old people begging in the streets and some old men used to be street wander. Even in this age they have to earn money for themselves. You know why, because the children for whom they earn money, their whole life were so selfish to throw them out from their own house when it’s their turn to do something for them. Isn’t it harsh? Yeah! It is. I saw this kinds of examples everywhere. In train, in buses, in streets, even in my neighbourhood. When I tell them to complain, they say no…. A big no. As, according they don’t want to see their children behind the bar or in any misery. Their children…… How can you even call them you children baba? When they just think about themselves. Well, it’s good. I want to awake each and everyone from us to help those needy people. We have to wake them up. We have to tell them about their rights. We can help those kids by sending them to school, by making them literate. Now, I want to an incident with everyone. One day, I was going to give an exam to another city by train. I was seating on the window seat and was looking outside. Suddenly, two old couple came inside the train in hurry and sat on the floor. They were looking here and there in order to hide themselves from someone. Right after 2 minutes, a cop came inside the train asking about those two. He was searching for them in hurry. As, it was time for train to leave the station. The cop soon got his hands on those two started to pull them towards the door. He was abusing them and treating them impolitely. He was very I’ll – mannered. He held old man’s collar and keep pulling him outside. The old man said sorry so many times. As, he didn’t have ticket with him and stole the food. But, the cop wasn’t listening. The cop was looking as he stole the food from someone’s stall. The old man was in wear off clothes. The old women was in alson worn off saree. The old man was keep saying sorry. But, the cop was behaving like he’s deaf. He throw him out of the train. I was looking from the window. I saw a boy coming from far away who asked cop to leave those old couple. But, he didn’t listen to him. So, he gave some money to settle things. And it works. The cop left. The boy asked them why did they stole the food? They told the whole story. They told him that their son threw them out of their own house and made them to beg. Nobody was helping. The old man told him that his wife was diabetic and needed something to eat as she was feeling dizzy. So, he started begging. When didn’t get anything. He asked a shopkeeper to give him some food. But, the shopkeeper denied. So, he decided to steal some food for his wife. He was looking helpless. Why can’t people help? Why didn’t the shopkeeper give some food? Why didn’t the cop listen to him? The boy listened to him and felt sorry, so was I. The boy gave them some money. The train left the station. During my journey that day, I was just thinking about those old couples. I am really to be born in this harsh and selfish world. We don’t show humanity and we call ourselves human.

इंतेहा प्यार की

Chapter 1

हम जब मिले

“प्रेक्षा प्रेक्षा ” – रमेश शाह ने अपनी बेटी को आवाज लगायी।  रमेश शाह बैंक जाने के लिए घर के दरवाजे पर खड़ा था। “प्रेक्षा…. ” – रमेश ने फिर आवाज लगायी।

” जी पापा, आ गयी ” प्रेक्षा दौड़ती हुई बोली।

” कॉलेज के लिए देर हो जायेगी, जल्दी चलो”-  रमेश ने प्रेक्षा को डांट लगायी। ऐसे ही बात करते हुए वे दोनों घर से निकल गए। रमेश ने प्रेक्षा को कॉलेज में छोड़ा। और खुद बैंक चला गया।

प्रेक्षा अपनी क्लास में पहुँची। “मैम क्या मैं अंदर आ जाऊ” – प्रेक्षा ने अपनी अध्यापिका से इज़ाज़त मांगी।

“तुम देर से आई हो” – मैम ने कहा।

“सॉरी मैम, दोबारा ऐसा नहीं होगा” – प्रेक्षा ने कहा।

“अच्छा, आ जाओ। लेकिन दोबारा ऐसा नहीं होना चाहिए” – शिक्षिका ने उसे चेतावनी दी।

प्रेक्षा ने क्लास में प्रवेश किया। और किनारे की ही एक सीट पर जाकर बैठ गयी।

तभी दरवाजे पर एक लड़का आकर बोला – ” मैम हम अंदर आ जाये क्या। माफ करना थोड़ी देरी हो गयी” इससे पहले की मैम कुछ बोल पाती। ” मैम, वो क्या हैं ना हमारे पिताजी को दफ्तर छोड़ने जाना पड़ा, आज उनकी गाड़ी नहीं आयी, बुढ़ापे में कंहा बसों के धक्के खायेंगे, इसीलिए बस हम चले गए उन्हें छोड़ने” – लड़के ने बताया।

“सारी बातें दरवाजे पर ही करोगे क्या, आ जाओ अंदर ” – मैम ने टोकते हुए कहा।

लड़के ने क्लास में प्रवेश किया। कंही जगह नहीं मिलने की वजह से वह प्रेक्षा के पास आकर बैठ गया. प्रेक्षा ने धीरे से कहा – ” तुम्हें नजर नहीं आता।मैं बैठी हूँ यहाँ, तुम कहीं ओर जाकर बैठो”

“हमें तो सब साफ साफ नजर आता हैं इसीलिए यहाँ बैठे, आपकी नज़रें थोड़ी कमजोर है लगता है, इसीलिए आपको नजर नहीं आ रहा कि ओर कहीं भी जगह नहीं है” – लड़के ने जवाब दिया।

प्रेक्षा ने चारों तरफ देखा ओर शांति से बैठ गयी। क्योंकि वास्तव मे कहीं जगह नहीं थी। दोनों ने क्लास ली ओर क्लास के बाद जगह बदल ली।

प्रेक्षा की सहेली उसके पास आकर बैठ गयी ओर वह लड़का अपने मित्रों के पास जाकर बैठ गया।

प्रेक्षा की सहेली जीविका ने कहा – ” ये लड़का कितना बोलता है, पर फिर भी कितना क्यूट है। है ना ”

” क्या, क्या, क्या क्या कहा तूने, ये ओर क्यूट” – प्रेक्षा ने कहा।

” हाँ यार, मुझे तो लगा क्यूट ” – जीविका ने जवाब दिया।

” रहने दे, कहाँ से लगा तुझे ये क्यूट ” – प्रेक्षा ने पूछा।

“इसके बोलने का तरीका कितना अच्छा है “- जीविका ने जवाब दिया।

“आह! यार अब तू उसकी तारीफ मत करने लगना। मैंने देखा कितना क्यूट है। मेरे पास ही बैठा था, इसीलिए कह रही हूँ मत कह उसे क्यूट” – प्रेक्षा ने कहा।

” चल छोड़ उसे, क्लास के बाद कैंटीन चलेंगे” – जीविका ने कहा।

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Extinct Humanity

Thank godness, we are still breathing in this cruel world. It means, we are alive. But, are we really alive? I don’t think so. If we talk about pupeet, they move but it does not mean that they are alive. Similarly, we are moving, but we are not alive because our soul, our humanity and our kindness are all dead. I am sorry  to say but We are all dead. I feel so bad to Accept that I am so weak. If I can’t protect anyone. I am weak. I am sorry for myself, for being so weak. One Day, I was Eating something on roadside stall and I saw a five years old boy asking for food to everyone. He came to Me and said. ” Give me ten rupees, I will eat parantha”. I said- ” Okey, I will pay for your parantha but first take me to the shop I will directly give money to the shopkeeper”. He said- ” No, give me money”. I said- ” Do one thing, come with me and you Can eat your fill”. He said – “I can’t, they will beat me”. Now, after listening I can imagine that What kind of life Is he living? But, I get to know that how I am living a meaningless life. 

Peace lover

Peace lover

Who knows who I am

Who can understand me

Life is like a leaf on the tree

Gotta fall when it ends for thea

Cross your fingers in agony

Stop worrying for the fairies

Don’t eat sweets though

Because I like berries

I want peace everywhere

I plea for peace with my stories

Maintain the distance

I’m in foul mood

Just give one thing

That you know my buddies

Peaceful night, peaceful days

Peaceful every steps ahead

Peace and peace and peace

All this voilence i can’t see

Take my hand and take me away

In the world of peace, yeah peace

Where bird chirp and flies

In happiness and in bliss

The cross roads

Writer’s appeal

I am Preeti Sharma. I hope, you will like this story. So, please give your Love and support. Now, I want to bring your attention towards this story. It doesn’t involve any real character and it is completely fictional. This story gives an idea how can different people meet with each others and how their path will become one. It tells about the journey of Henry and Ashley and shows the hurdles which they get in between their journey. It is a interesting story. I hope, you will like it and give it your love and support.

Prologue

We Can’t always walk on the same path. Similarly, this story also emphases on the path followed by two strangers.. Henry and Ashley and their journey that pulled them on the same path. Henry was a man with beard and brown eyes who worked in an IT company. Whereas, Ashley was a beautiful young lady with blue eyes and Golden hair. She was the owner of a bakery shop and was a very good cook. The begining of the journey is quite full of adventures. This story emphases on the quarrelling and understanding between  both of them during the journey. It also shows how the different path followed by different people becomes same. This story may pull the reader’s attention with its plot where Henry and Ashley met each other because of a misunderstanding which afterwards made them friends. If you Like suspense and drama. Then, this is the best dramatic story for readers.. I hope, you will enjoy this story.

Chapter 1

“It’s Monday, right. So, I will see you today at pixy cafe. Yeah, yeah…. I know you are still at office. But, you will have to come. No matter what… ” Ashley said on the phone in sarcastic tone and with elated expression. Ashley was 20 years old beautiful young lady with fair complexion, blue eyes and Golden hair. She was the owner of a bakery shop named as D delight bakery shop.

“I will come there. But, it will take time dear. So, wait there for me darling”. Hazel said with a pleasant smile on her face. Hazel was 18 years old pretty young lady with fair comlexion, dark brown hair and blue – green eyes. She used to wear spectacules. And she is 2 years younger than Ashley. They both were sisters and share a strong bond with each other.

“Okey, I will wait. But, try to come before the party started. See you there” Ashley said with a joyous smile and hung up the phone.

On the other side, Henry was working on his laptop with anxiety. ” I have to complete it today, no matter what. Otherwise the boss will make me insane”. He said in irritated manner and furious tone. Then, suddenly his phone rang. And it was his boss. He picked up the phone.

“Hello, Henry…… My boy. Haven’t you completed that project yet? You didn’t send me mail? ” Mr. Sharlene said from the other side. “I was waiting for your mail from the morning”. He taunted him.

“Yeah.. Yeah.. Actually sir, I was just giving it a finishing touch. I will send you the project mail after one hour”. Henry said to him in convincing way.

“One…hour, don’t you think! it’s too much.. ” Mr. Sharlene said with bewilderment.

No, sir. If you want this presentation to be the best. Then, please give me just one hour to make it perfect”. Henry said with assuredness. His eyes were sparkling.

“Ok, then… Send me the mail after one hour. Good luck”. Mr. Sharlene hung up the phone with his last words of belief.

Henry completed his work, sent the mail to his boss.. And took a deep breath.. ” Phew.. “. He turned off his laptop and lay down on the couch to take some rest. He was watching the fan on the ceiling and said to himself  “After doing that much work, I get to take some breath at last”. Henry was 21 years old muscular man.

He turned to the left to take some sleep. But, suddenly his phone rang. He picked the phone. It was his best friend joe on the other side.

“Hola! Henry. ¿ cómo estás? ” Joe said with delight and with a sparkle in his eyes.

“Hola! I am good joe. Henry replied. Please don’t talk in Spanish. How many time I have to tell you… I am very bad at it”. Henry replied sadly.

“Hahaha…” Joe laughed pleasantly. Joe was a tall man with long beard and fair complexion. He was originally from Spain but end up doing a mechanic job in America.

Why’d you call? Henry asked tiredly. I hope you didn’t call just to throw your baseless jokes here. I’m so tired right now. So tell me the reason, coz i can’t take them anymore”. Henry said in low voice.

“I am going to meet my novia nueva. This going to be our first meeting. Y yo quiero  impress ella. Pero, you know no hablo inglés buena. So, please come with me for help. ” Joe whispered to him. And then he took a deep breath.

Henry settled himself on the couch. Then, he asked surprisingly – “What do you mean by novia nueva. I didn’t get it.”

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ईश्वर की देन – सुंदरता और समझदारी

एक बार कोणार्कगढ़ राज्य के राजा के घर एक बहुत सुंदर कन्या का जन्म हुआ। जिसका नाम राजा ने रति रखा। वह कन्या इतनी सुंदर थी कि आस – पास के राज्य मे ऐसी सुंदर कोई कन्या नहीं थी। उसकी सुंदरता को देख राजा को बस एक ही डर रहता था कि उसका विवाह होने से पहले कुछ अनहोनी न हो जाये। अपनी कन्या को लोगो की बुरी नज़र से बचाने के लिए उसने अपनी कन्या को कभी महल से बाहर नही जाने दिया। इसके अलावा राजा ने अपनी कन्या को लोगो से लड़ पाने के लिए उसे शस्त्र – विद्या भी सिखाई। इतनी सुंदर होने के कारण उस कन्या में एक कमी भी थी उसे स्वयं पर एवं अपने पिता के राजा होने पर बहुत घमंड था। इसीलिए वह किसी भी दासी से अच्छे से बात नही करती थी। वहीं दूसरी तरफ उसी राज्य में एक ब्राह्मण के यहां भी एक कन्या का जन्म हुआ। जिसका नाम राधा रखा गया। वह कन्या दिखने में बिल्कुल सुंदर नहीं थी पर उसे बाल्यावस्था से ही एक गुण मिला था कि वह पूरे राज्य मे ही नहीं बल्कि आस – पास के सभी राज्यों में सबसे विद्वान मनुष्यों की श्रेणी में आती थीं। उसे पाँच वर्ष की आयु से ही बहुत सी जड़ी – बूटी एवं धार्मिक ग्रंथो का ज्ञान था। उसे बहुत – से शास्त्र तो कंठस्त थी। साथ ही साथ वह भगवान की पूजा भी करती थी। दोनों ही कन्यायें एक दूसरे से बिल्कुल भिन्न थी, परंतु फिर भी बार – बार प्रकृति उन्हें एक दूसरे के आस- पास ले आती थी। परंतु राजकुमारी अपने घमंड के कारण उस कन्या को देख कर भी अनदेखा कर देती थी। परंतु उन दोनों में एक समानता भी थी वे दोनों ही दिल की बहुत अच्छी थी। एक बार प्रकृति ने ऐसा खेल रचा के वो दोनों एक दूसरे को अनदेखा कर ही नहीं पाई। वास्तव में हुआ यूं के एक बार ब्राह्मण की कन्या जिसका नाम राधा था मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए गयी पर आते वक्त वह पास के बगीचे में टहलने के लिए रुक गयी। बगीचे में बहुत सुंदर फूल, पेड़ – पौधे और एक छोटा सा तालाब भी था। मंदिर से कुछ ही दूर एक नदीं बहती थी। बगीचा मंदिर के भीतर ही था। उसी दिन राजकुमारी भी बगीचे में टहलने आ गयी।

राजकुमारी रति बहुत घमंडी थी क्योंकि उसे यह लगता था कि सौंदर्य सभी गुणों में सर्वोपरि होता हैं। दिल अच्छा होते हुए भी उसका घमंड उसके अच्छे कर्मों के आड़े आ जाता था।

राजकुमारी का नाम ” राजकुमारी रति ” था। जब उसने उस कन्या को बगीचे में टहलते देखा तो उसने अपनी एक दासी को भेजकर कहलवा दिया कि वो यहां से चली जाए क्योंकि अब राजकुमारी यहां टहलने आयी हैं। परंतु राधा ने विन्रमता पूर्वक राजकुमारी से मिलने का प्रस्ताव रखा।

राधा एक नेकदिल व समझदार लड़की थी। उसे ईश्वर पर भरोसा था। इसीलिए वह सभी से प्रेम से बात करती थी। और अपनी समझदारी के बल पर सबका मन मोह लेती थी।

राजकुमारी ने मना कर दिया। इस पर राधा ने दासी को समझाते हुए कहा -” कि राजकुमारी से कहो कि मुझे कुछ पूछना है इसीलिए मैं उनसे मिलना चाहती हूँ”। परंतु राजकुमारी नहीं मानी । तभी आस- पास कुछ शोर सुनाई दिया । इस पर राजकुमारी रति और राधा दोनो उस और दौड़े तभी उन्हें पता चला कि एक बालक नदीं में गिर गया हैं। राधा ने थोड़ा सोचा औऱ मंदिर से एक रस्सी ले आयी। उधर राजकुमारी पानी मे कूदने की तैयारी कर रही थी। तभी राधा ने कहा – “कि ये रस्सी अपनी कमर में बांध लो”। राजकुमारी ने पहले तो मना कर दिया पर जब गौर से देखा कि वह रस्सी एक पेड़ से बंधी हैं तो वह समझ गयी कि राधा ने क्या सोचा हैं। और उसने रस्सी अपनी कमर के बांध ली और नदीं के अंदर छलांग लगा दी। उसने बच्चे को कस के पकड़ लिया और आस – पास खड़े लोगो ने और राधा ने मिलकर उन्हें ऊपर खींच लिया। सबने उनकी बहादुरी की सराहना की। उन्होंने सभी को धन्यवाद कहा और अपने रास्ते चल दिये। तभी राधा ने राजकुमारी को रोक कर बात करने की कोशिश की परंतु राजकुमारी ने फिर मना कर दिया। तब राजकुमारी रति से राधा ने सिर्फ यहीं कहा कि – “तुम्हें अपनी सुंदरता पर घमंड हैं परंतु यदि तुम मुझे हरा दो तो मैं तुम्हे सुंदर मानु।” यह सुनकर राजकुमारी रति क्रोधित हो गयी और उन्होंने राधा को नीचा दिखाने के लिए हां कर दी। तब राधा ने कहा – ” कल फिर उसी बगीचे में मिलेंगे। जहां हमारी प्रतिस्पर्धा होगी। बाकी बाते कल करेंगे”।….

आखिर राधा ने राजकुमारी रति के घमंड को चूर- चूर कर दिया। कैसे?? आओ देखते हैं।

अगले दिन जब राधा और राजकुमारी रति मिले । तब राधा ने उनके सामने एक प्रतिस्पर्धा करने का प्रस्ताव रखा। राजकुमारी भी प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो गयी। इस पर राधा ने राजकुमारी को प्रतिस्पर्धा के कुछ नियमों से अवगत कराया। उसने बताया – “कि प्रतिस्पर्धा का एक स्तर तुम निर्धारित करोगी एवं दूसरा मैं। परंतु आखरी स्तर तुम्हारी एवम मेरी सखियां मिलकर निर्धारित करेंगीं। ताकि किसी प्रकार का कोई पक्षपात न हो”। इस पर राजकुमारी मान गयी। और प्रतिस्पर्धा आरंभ हुई। पहले राधा ने राजकुमारी रति को स्तर चुनने को कहा। तो राजकुमारी ने तलवारबाजी को चुना। क्योंकि वह शस्त्र विद्या में निपुण थी। और राजकुमारी ने अपनी दासियो से कहकर दो तलवारो का प्रबंध किया। और कुछ ही देर में प्रतिस्पर्धा के पहले स्तर का आरंभ हुआ। दोनो में तलवारबाजी शुरू हुई। राधा को शास्त्र का तो ज्ञान था परंतु शस्त्र का नही। फिर भी वह अपनी पूरी ताकत से कोशिश कर रही थी। परंतु राजकुमारी रति जो इस विद्या में निपुण थी बहुत आसानी से तलवार चला रही थी। जब दोनों की तलवारे टकरा रही थी तो दोनों की सखियाँ एवम राजकुमारी की दासियाँ भी उनका हौसला बढ़ा रही थी। राजकुमारी तलवार बहुत तेज़ी से चला रही थी इसीलिये राधा को बहुत तकलीफ हो रही थी। अब वह थक चुकी थी। परंतु फिर भी अपनी जगह पर डटी हुई थी। इस बार राजकुमारी ने अपनी तलवार उठायी तो राधा ने झुककर स्वयं को बचा लिया। उधर से एक बार राजकुमारी का वार हुआ। और एक बार फिर राधा ने स्वयं को बचा लिया।पर इस बार राधा थोड़ी घायल हो गयी। तभी राजकुमारी ने दुबारा वार किया। अचानक हुए वार को राधा संभाल नही पायी औऱ उसकी तलवार हाथ से छूटकर गिर गयी। और राजकुमारी ने तभी अपनी तलवार उसकी गर्दन पर तान दी। उधर किसी ने राजा को यह समाचार दे दिया था। इसलिए राजा भी वहां आ चुके थे। यही नहीं उन्होंने यह सब देख भी लिया था।

जब वो अपनी बेटी को रोकने के लिए आगे बढ़ रहे थे तभी किसी ने उन्हें रोक दिया आखिर वो कौन था?? जिसने उन्हें रोक दिया।

जब राजा ने पीछे मुड़कर देखा तो वहाँ कोई और नहीं बल्कि महारानी श्यामली थी। राजा ने जब महारानी से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि – “हमारी राजकुमारी को अपने राजकुमारी होने और सब कुछ मिल जाने के कारण स्वयं पर घमंड हो गया है। और इसको यदि अभी समाप्त नहीं किया गया तो वह कभी किसी मनुष्य का सम्मान नही करेगी। इसी कारण उसे ये प्रतिस्पर्धा करने दीजिये ताकि इससे राजकुमारी को सीख मिले और वह सभी मनुष्यों का सम्मान करे”।

राजा अब समझ चुके थे कि – अपनी पुत्री को सब कुछ देकर भी वह क्या नहीं दे पाए। वह जान गये थे कि – वह अपनी पुत्री को दुसरो का सम्मान करना नहीं सिखा पाए। अब वे महारानी की बात समझ गए थे और इसीलिए वे वहीं शातिं से खड़े होकर वह प्रतिस्पर्धा देखने लगे ।

पहले स्तर में राधा ने अपनी हार स्वीकार करते हुए, दूसरे स्तर का प्रस्ताव रखा। और राजकुमारी ने अपनी जीत के घमंड में चूर होकर हाँ कर दी।

राधा ने पहले स्तर में हार कर भी हार नहीं मानी । अब वह अपनी चुनौती के साथ तैयार थी। राधा अपने ज्ञान से राजकुमारी का घमंड चूर – चूर करना चाहती थी।

इस बार राधा को स्तर चुनना था। तो उसने समझदारी से काम लेते हुए ज्ञान को चुना अर्थात उसने शास्त्र विद्या को चुना। और फिर राधा ने राजकुमारी से शास्त्रों से संबंधिफत प्रश्न पूछे। इन प्रश्नों को सुनते ही राजकुमारी का दिमाग घूम गया। वह उन प्रश्नों के जवाब देने में असक्षम थी, इसलिए वह उस चरण में सफल नहीं हो पाई। अर्थात दूसरे चरण में हार राजकुमारी की हुई। अब बारी तीसरे चरण की थी। जिसका चुनाव राजकुमारी रति एवं राधा की सखियों को करना था। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था। तभी कुछ सोचने के पश्चात राधा की एक सहेली ने दौङ की प्रतिस्पर्धा का सुझाव दिया। सबने बहुत सोच – विचार किया। अंत में सभी ने फैसला किया – कि प्रतिस्पर्धा का तीसरा चरण यही सही रहेगा। राजकुमारी रति की सखियाँ जानती थी कि राजकुमारी रोज सवेरे व्यायाम करती हैं एवं दौड़ लगाती है। इसलिए उन्होंने सोचा कि राजकुमारी इस चरण में जरूर जीतेंगी। यही सोचकर उन्होंने स्वीकार कर लिया और प्रतिस्पर्धा के नियम से दोनों प्रतियोगियों को अवगत कराया। इस प्रतिस्पर्धा में दोनों को एक वृक्ष को छूकर वापस आना था। जो वृक्ष को छूकर पहले लौटता है वही विजेता होगा ।आखिर प्रतिस्पर्धा आरंभ हुई। राधा एवं रति दोनों ही अपनी पूरी जान लगाकर दौड़ रही थी। दोनों अब उस वृक्ष तक पहुँचने ही वाले थे कि – तभी दौड़ते – दौड़ते अचानक राजकुमारी रति का पैर मुड़ गया और वह गिर पड़ी। राधा चाहती तो राजकुमारी को वही छोड़कर, उस प्रतिस्पर्धा में विजयी हो सकती थी। परन्तु उसने एेसा नहीं किया। बल्कि राधा ने तो राजकुमारी रति की सहायता की। राधा ने राजकुमारी को सहारा दिया और कहा कि अब इस प्रतिस्पर्धा में विजयी हम दोनों होंगे। राधा राजकुमारी को उसी वृक्ष के पास ले गयी और कहा -” लो अब जीत हम दोनों की हुई, अब आप यहाँ विश्राम करें”। राजकुमारी राधा की इस उदारता एवं स्नेह को देख गद्य- गद्य हो उठी और राधा को अपने गले से लगा लिया। अब वह दोनों सखी बन गयी थी।

वही दूसरी तरफ राजा और रानी यह सब देख रहे थे। महाराज रानी के किये निर्णय पर प्रसन्न थे। क्योंकि अब उनकी पुत्री सभी मनुष्यों का सम्मान करना सीख गयी थी। अब उन्हे कोई भय नही था क्योंकि राजकुमारी की सखी राधा जो बन गयी थी। राजा और रानी ने राधा की सरहाना की और उसे धन्यवाद भी कहा। राधा ने मुस्कुराते हुए उनका अभिवादन किया।