मान जा एे – दिल मेरे

मान जा – एे दिल मेरे

मान जा एे मेरे दिल
क्यों विश्वास उन पर कर रहा
जो छोड़ कर थे जा चुके
क्यों प्यार उनसे कर रहा
मौके है तूने कई दिये
तब तो उन्हें एहसास ना था
फिर अब क्यूँ लौट आए वो
जब जरूरत में कोई पास न था
चल चले अब दूर उन रिश्तों
से विदा माँग कर
ना आएंगे अब लौट कर
दिल से कभी यूँ हार कर
तू भूल जा एे दिल मेरे
वो नाम ना तेरे किसी काम का
हैं बस सदा मतलब का ही
और बेरंगी शाम का
अच्छा है तू दूर ही रहे
पलकों के आँसू सम्भाल कर
चाहे तो रोले अकेले में
अपने ये दर्द सम्भाल कर
जीना शुरू कर खुद के लिए
ना कोई अब तुझे रोकता
हैं जिंदगी तेरी, तू जी
ना कोई तुझको टोकता
तू चुप रह खामोशी में भी
बात लाखों कह रहा
मान जा जरा एे दिल मेरे
क्यों विश्वास उन पर कर रहा
जो जा चुके थे छोड़के
क्यों प्यार उनसे कर रहा

20 responses to “मान जा एे – दिल मेरे”

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