शायरी

मैं शायर तो नहीं, पर फिर भी कभी कभी।

आ जाती है जुबान पर, कोई शायरी।

मैं शायर तो नहीं, फिर भी कभी कभी। 

आ जाती है जुबान पर, कोई शायरी। 

ॐ नमः शिवायें

 जब हम कॉलेज में थे तो एक शायरी लिखी थी । सुनकर शायद आपको लगे की किसी के छोड़ने या दिल तोड़ने पर लिखी है, पर ऐसा नहीं है। शायरी पूरी पढ़ने पर समझ आ ही जायेगा ये तो। हाँ! ये शायरी पढ़कर आप मुस्कुरायेंगे जरूर। यदि आपके चेहरे पर हमारी शायरी मुस्कुराहट लाये चाहे वो हल्की सी ही क्यों ना हो। पोस्ट को पसंद जरूर कर दीजियेगा। आखिर हम भी रिस्क लेकर कॉलेज का किस्सा सांझा कर रहे है आपसे। 

खैर, हम B.Sc में थे। गणित का लेक्चर था। हम पीछे अपने दोस्तों के साथ बैठे थे। क्लास में बिल्कुल मजा नहीं आ रहा था। नींद भी आ रही थी। ऐसा नहीं था कि हमारे अध्यापक अच्छा नहीं पढ़ाते थे। वो तो हम ही निकम्मे थे। जिसका पढाई में मन नहीं लग रहा था। असल में कुछ दिनों से हम परेशान थे। एक लड़का हमें काफी दिनों से देख रहा था। या ये कहे कि हम उसे देख रहे थे कि वो हमें देख रहा है। मतलब शायद हमें पसंद करता था। लेकिन हमें तो पढाई और किताबों से ही प्रेम था। इसीलिए जरा तरस आता था। हमारी दोस्त हमें छेड़ने लगी, जैसे ही वो क्लास के बाहर से गुजरा। सच कहे तो हमें अपने दोस्त की बात पर बिल्कुल गुस्सा नहीं आया। बल्कि हंसी आयी। इसीलिए अपनी दोस्त को समझाने के लिए कि हमें कोई दिलचस्पी नहीं है इसमें हमने उस लड़के की तरफ से अपने लिए ही ये शायरी लिख डाली। जिसका सीधा सा मतलब था के तुम नहीं तो कोई और सही। शायरी कुछ इस प्रकार है – 

अक्सर रोता था मैं तुझे याद करके

अक्सर रोता था मैं तुझे याद करके

दूर हो गयी तू मुझे बर्बाद करके

दूर.. हो गयी तू मुझे बर्बाद करके

मैं आज भी तेरी राह में पलके बिछाए बैठा हूँ। 

तुझे माफ कर, दिल से अपनाये बैठा हूँ। 

पर ऐ बेवफ़ा, 

पर ऐ बेवफ़ा, 

तुझे मेरी कदर कहाँ

पर ऐ बेवफ़ा, 

पर ऐ बेवफ़ा, 

तुझे मेरी कदर कहाँ

इसीलिए, इसीलिए कॉलेज की नई लड़की पटाये बैठा हूँ। 

तो इससे पता चलता है कि सच्चे प्यार को जाने ना दो। नहीं तो वो तुम्हें जाने देगा। 😂

25 responses to “शायरी”

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