Bholenath

पर्वतों पर बैठा है तू, जाने ना मेरा हाल है क्या

देख ले बाबा आकर पहले, बालक तेरा बेहाल है क्या

छोड़ दी माया, त्यागा सब कुछ फिर भी आया काल है क्या

देख ले बाबा आकर पहले, बालक तेरा बेहाल है क्या

रोक रहा हूँ आंसू कब से फिर भी बहते जाते है

हाल मेरा क्या बोलू ना मैं फिर भी ये कहते जाते है

गंगा जी का पानी जैसे बहता है चाहे साल हो क्या

देख ले बाबा आकर पहले, बालक तेरा बेहाल है क्या

रोक सकूँ ना खुद को अब तो, तेरे आगे कहने से

बाबा मेरी जान निकलती अब तेरे चुप रहने से

आँसू की जो नदी बनी है, पूछो ना कोई ताल है क्या

देख ले बाबा आकर पहले, बालक तेरा बेहाल है क्या

पर्वतों पर बैठा है तू, जाने ना मेरा हाल है क्या

देख ले बाबा आकर पहले, बालक तेरा बेहाल है क्या

काट रहा हूँ जीवन कैसे, ये तो तू भी जाने है

जीने में ये जीना कैसा ये तो तू भी माने है

दौड़ रहा हूँ, भाग रहा हूँ, दुनिया की इस भीड़ में

फिर भी ना पहचान मिले है, मुझको मेरी पीर में

तू तो जाने पीर मेरी फिर बैठा क्यूँ चुपचाप वहाँ

माँग रहा हूँ कब से तुझसे, दे दे मुझे मेरा जहाँ

खड़ा है मेरे आगे डट के, बोल तू कोई ढाल है क्या

देख ले बाबा आकर पहले, बालक तेरा बेहाल है क्या

पर्वतों पर बैठा है तू, जाने ना मेरा हाल है क्या

देख ले बाबा आकर पहले, बालक तेरा बेहाल है क्या

33 responses to “Bholenath”

      • शायद मुझे इसके बारे में एक शब्द भी नहीं कहना चाहिए
        कुछ अच्छा था या नहीं
        मुझे केवल इतना पता है कि इस तथ्य के बाद

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      • आपको जो सही लगता है आप बता सकते है, अगर कुछ गलती है तो मैं सही कर पाऊँगी

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      • आपके प्रस्ताव के लिए धन्यवाद,

        शब्दों
        लाओ
        हकीकत बात तक नहीं पहुँचती

        न तो
        खुद का
        ना ही किसी और की असल जिंदगी

        अपूर्णता के साथ
        समझ का
        मुझे इसके साथ रहना है

        सादर

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