चल चला चल, चल चला चल

चल चला चल चल चला चल, सामने तेरे मंज़िल खड़ी। 

तेरा है मकसद जीतना कोई नहीं मुश्किल खड़ी। 

तू याद रख, के फिर ना ये मौका वापस आयेगा। 

जो आया है तेरे हाथ में, वो हाथ से चला जायेगा। 

पर अगर तू दृढ़ है तो भूलना ना बात ये। 

जिस राह पर तू चल पड़ा वो ही अब तेरे साथ रे। 

ना हारना अब आखिरी ये वक़्त की फुंकार है। है जीतना अब जीतना हाँ मुझको इस बार है। 

चाहे आये कोई तूफान, चाहे मैं मिट्टी में मिलू। 

चाहे कोई रोके मुझे, पर मैं आगे ही चलू। 

ना मंजिलें खोये कहीं और रास्ता आसान हो। 

ये आसमान भी झुक जाए गर मंजिलों पे ध्यान हो। 

अब रुक नहीं सकता मैं मेरा आखिरी ये काम है। 

चल चला चल चल चला चल, ये मेरा पैगाम है। 

रोशन है अब तो रास्ते, मंजिलें ना दूर है। 

तेरी इस ज़िद के आगे, तो आसमां मजबूर है। 

वो भी झुकेगा देखना, हर और तेरा नाम है। 

तू चल चला चल चल चला चल, ये मेरा पैगाम है।

तू सख्त है तू वक़्त है तू आज का अर्जुन बना। 

तेरी है मंजिल सामने, तेरे सामने सूरज ढला। 

ना जाने दे इस रात को, चल अपनी राह पे चला। 

तुझे जीतना है जीतना तेरा कृष्ण तेरे साथ है। 

तू आगे बढ़ तो सही, तेरे हाथों में उसका हाथ है। 

ना हारने देगा तुझे, विश्वास ये मन में जगा। 

बढ़ता तू जा आगे, नहीं किसी बात को दिल से लगा। 

ना टूटना तू फिर कहीं, आगे बढ़ने का बस काम है। 

लो दिन ढला एक और फिर होने वाली शाम है। 

तू चल चला चल चल चला चल, ये मेरा पैगाम है। -2

28 responses to “चल चला चल, चल चला चल”

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