इंतेहा प्यार की #2

अगले दिन जब प्रेक्षा कॉलेज में आई तो जीविका उसे गेट पर ही मिल गयी। जीविका ने प्रेक्षा से पूछा – ” क्या जवाब देगी, क्या उससे दोस्ती करेगी? कुछ सोचा भी है या नहीं, बता ना यार” । 

” पहले चुप तो हो, तू बोलेगी तो मैं कैसे बोलूँगी” – प्रेक्षा ने कहा। 

जीविका चुपचाप उसके साथ – साथ चलने लगी। प्रेक्षा चुप रही। 

कुछ देर बाद प्रेक्षा रूकी और जीविका को कहा ” मैं उससे दोस्ती नहीं कर सकती। मैं उसे आज साफ़ मना कर दूँगी और कह दूँगी मुझसे दूर रहे। “

जीविका ने कहा – ” जैसा तुझे सही लगे, पर दोस्ती करना गलत नहीं है।

प्रेक्षा चुप थी। जीविका समझ गयी कि वो परेशान है। इसीलिए उसने उसका मूड ठीक करने के लिए कहा –  ” सही है यार, कह देना उसको तुझे उससे दोस्ती नहीं करनी। बाकी बाद में देख लेंगे। “

” मैंने कहा ना मुझे दोस्ती नहीं करनी। ” – प्रेक्षा ने चिल्लाते हुए कहा। जीविका ने कहा “ओके ओके, ठीक है बाबा जो करना है वो कर बस परेशान मत हो। “

वो दोनों चुपचाप क्लास की तरफ बढ़ने लगे, क्लास में पहुँचने पर उन्होंने देखा कि पूरी क्लास भरी थी, कहीं जगह नहीं थी। बस एक बैंच को छोड़कर जिसके आगे वाले बैंच पर अभिनव बैठा था।

वो दोनों  उस बैंच की तरफ बढ़ी प्रेक्षा अपनी नजरें अभिनव से बचा रहीे थी, ताकि वो उसके सवाल को नजरादाज़ कर सके।

जैसे ही प्रेक्षा उस बैंच पर बैठी, अभिनव ने जीविका को रोक दिया और बिना समय गवाए खुद उस बैंच पर जाकर बैठ गया, प्रेक्षा उसे गुस्से से घूरने लगी। जीविका उसे समझाने की कोशिश कर रही थी – कि प्रेक्षा आज परेशान है और वो उसे और परेशान ना करे, पर अभिनव उसकी बात समझने के लिए तैयार ही नहीं था।

” देखो अभि मुझे इस जगह पर बैठने दो, तुम वापस अपनी जगह पर जाओ” – जीविका ने कहा।

“क्या इस जगह पर आपका नाम लिखा है। ” – अभिनव ने जीविका से ताना मारते हुए कहा।

” देखो आज प्रेक्षा का मूड बहुत खराब है, तुम जाओ अपनी जगह पर, प्लीज़” – जीविका ने विनती करते हुए कहा।

पर अभिनव तो जैसे सोच कर आया था, उसने कहा, – ” मैं आपकी दोस्त से कुछ नहीं कहूंगा । बस एक सवाल का जवाब चाहिए मुझे, वही जवाब लेने आया हूँ। फिर चला जाऊंगा। “

प्रेक्षा काफी देर से ये सब देख रही थी अब तो जैसे उसका पारा हाई हो गया था, ज्वालामुखी विस्फोट के लिए तैयार था – ” तुम्हे समझ नहीं आता…. जाओ अपनी जगह पर और रही बात जवाब की, तो सुन लो ध्यान से, नहीं करनी मुझे तुमसे दोस्ती। जाओ अब यहाँ से” – प्रेक्षा ने चिल्लाते हुए कहा और वापिस अपनी जगह पर बैठ गयी।

“ठीक है मैं जा रहा हूँ ।  अगर आपका यही फैसला है तो ठीक है” – अभिनव ने कहा और वहाँ से चला गया।

जीविका प्रेक्षा के पास आकर बैठ गयी।

प्रेक्षा सुबह जीविका पर चिल्लाना नहीं चाहती थी, पर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने धीरे से जीविका से कहा – ” सॉरी” इससे आगे वो कुछ नहीं बोल पायी। लेकिन जीविका सब समझ गयी। वो अपनी दोस्त को अच्छे से जानती थी।

” कोई बात नहीं, तू मेरी दोस्त है, ऐसा तो चलता रहता है दोस्तों में ” – जीविका ने कहा।

दोनों ने क्लास ली और क्लास के बाद अपने अपने घर जाने लगे । जाते वक़्त जीविका ने प्रेक्षा को समझाया – ” तू टेंशन मत लेना, ध्यान रखना अपना।” और दोनों अपने अपने घर चले गए। 

प्रेक्षा पूरी रात यह सोच कर परेशान थी कि कही उसने कुछ ज्यादा ही तो नहीं बोल दिया। 

अगले दिन जब वो कॉलेज में आई तो उसे अभिनव कही नहीं दिखाई दिया। उसे लगा वह कॉलेज नहीं आया। पहले लेक्चर के बाद भी जब वो नहीं आया तो प्रेक्षा ने जीविका से पूछ ही लिया – “अभिनव कहाँ है?”

जीविका उसे घूर के देखने लगी। तभी प्रेक्षा ने नजरे नीचे कर ली। जीविका ने कहा – ” क्या बात है? तुझे बड़ी याद आ रही है उसकी”

प्रेक्षा ने किताब में देखते हुए कहा – ” नही तो मुझे कोई याद वाद नहीं आ रही उसकी, वो तो बस ऐसे ही पूछ लिया। “

जीविका जोर – जोर से हँसने लगी। जीविका ने कहा – ” तू भी ना।” फिर जीविका ने अपनी हँसी रोकते हुए कहा – “वो शायद आज कॉलेज ही नहीं आया है, मैनें उसके दोस्तों को कहते हुए सुना था कि वो आज अब्सेंट है। “

प्रेक्षा ने कहा – ” ठीक है, वैसे मुझे जानना ही नहीं था।”

जीविका मुस्कुराई और कहने लगी – ” हाँ तो मैं कौनसा तुझे बता रही हूँ, ये दीवारों ने पूछा मुझे तो मैं तो उन्हें ही (प्रेक्षा की तरफ झुकते हुए) जवाब दे रही थी।”

फिर दोनों हँसने लगे। तभी क्लास में टीचर आ गए। पढ़ते – पढ़ते भी प्रेक्षा का ध्यान अभिनव पर ही था। वह अभी भी उसी के बारे में सोचे जा रही थी। 

क्लास के बाद जीविका ने प्रेक्षा से कहा – ” चल प्रेक्षा कैंटीन चलते है, वैसे भी अगली क्लास तो फ्री है, उसके बाद तो घर ही जाना है। “

प्रेक्षा ने कहा – ” नहीं यार, मेरा मन नहीं है। चल घर चलते है सीधा”

जीविका ने कहा – ” यार, कल संडे है, यहाँ के समोसे फिर कहा मिलेंगे। “

प्रेक्षा ने जवाब दिया – “तो परसो खा लेना समोसे”

जीविका ने फिर समझाते हुए कहा – ” यार, परसो तक इंतज़ार कौन करे।चल ले ना प्लीज़ “

जीविका के बार – बार जोर डालने पर प्रेक्षा मान गयी और दोनों कैंटीन में चले गए। वो अपनी पुरानी सीट पर ही जाकर बैठ गए। वहाँ बैठते ही प्रेक्षा की नजर सामने वाली सीट पर पड़ी जहाँ अभिनव बैठता था। और वो फिर अभिनव के बारे में ही सोचने लगी। उसके दिमाग में बस यही चल रहा था कि कहीं अभिनव को उसकी किसी बात का बुरा तो नहीं लग गया, यही सोचकर वो परेशान हो रही थी। 

जीविका ने प्रेक्षा से पूछा – ” बता, समोसे के साथ क्या लेगी ” पर प्रेक्षा तो कहीं और खोयी थी उसने जीविका की बात नहीं सुनी। जीविका प्रेक्षा को हैरानी से देखने लगी और फिर उसे हिलाते हुए कहा – ” कहाँ खोयी है मैडम, क्या हुआ क्यों परेशान है” 

प्रेक्षा ने घबराते हुए जवाब दिया -” कुछ नहीं यार बस ऐसे ही कुछ …. कुछ …. नहीं, वो प्रोजेक्ट.. बस, वही सोच रही थी, क्या करना है, कैसे ओ ओ र र ओर कुछ नहीं”

जीविका ने कहा – ” अच्छा! मैं तो पूछ रही थी की समोसे के साथ क्या लेगी, आई मीन पीने के लिए “

प्रेक्षा ने कहा – ” नहीं मैं समोसा नहीं खाऊँगी, मुझे कुछ नहीं चाहिए, तू खा ले”

” क्या, क्यों ” – जीविका ने कहा। 

“कहा ना कुछ नहीं, बस मन नहीं है” – प्रेक्षा ने जवाब दिया। 

“अच्छा ठीक है मत खा ” – जीविका ने कहा। और समोसा खाने के बाद जीविका ने प्रेक्षा को चलने को कहा, पर प्रेक्षा अभी भी खोयी हुई थी, उसने फिर जीविका की बात नहीं सुनी। 

जीविका ने गुस्से से कहा – ” अब नहीं जाना क्या घर, चल अब जल्दी। “

प्रेक्षा जल्दी से खड़ी हुई और दोनों घर को चल दिये। 

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s