इंतेहा प्यार की

Chapter 1

हम जब मिले

“प्रेक्षा प्रेक्षा ” – रमेश शाह ने अपनी बेटी को आवाज लगायी।  रमेश शाह बैंक जाने के लिए घर के दरवाजे पर खड़ा था। “प्रेक्षा…. ” – रमेश ने फिर आवाज लगायी।

” जी पापा, आ गयी ” प्रेक्षा दौड़ती हुई बोली।

” कॉलेज के लिए देर हो जायेगी, जल्दी चलो”-  रमेश ने प्रेक्षा को डांट लगायी। ऐसे ही बात करते हुए वे दोनों घर से निकल गए। रमेश ने प्रेक्षा को कॉलेज में छोड़ा। और खुद बैंक चला गया।

प्रेक्षा अपनी क्लास में पहुँची। “मैम क्या मैं अंदर आ जाऊ” – प्रेक्षा ने अपनी अध्यापिका से इज़ाज़त मांगी।

“तुम देर से आई हो” – मैम ने कहा।

“सॉरी मैम, दोबारा ऐसा नहीं होगा” – प्रेक्षा ने कहा।

“अच्छा, आ जाओ। लेकिन दोबारा ऐसा नहीं होना चाहिए” – शिक्षिका ने उसे चेतावनी दी।

प्रेक्षा ने क्लास में प्रवेश किया। और किनारे की ही एक सीट पर जाकर बैठ गयी।

तभी दरवाजे पर एक लड़का आकर बोला – ” मैम हम अंदर आ जाये क्या। माफ करना थोड़ी देरी हो गयी” इससे पहले की मैम कुछ बोल पाती। ” मैम, वो क्या हैं ना हमारे पिताजी को दफ्तर छोड़ने जाना पड़ा, आज उनकी गाड़ी नहीं आयी, बुढ़ापे में कंहा बसों के धक्के खायेंगे, इसीलिए बस हम चले गए उन्हें छोड़ने” – लड़के ने बताया।

“सारी बातें दरवाजे पर ही करोगे क्या, आ जाओ अंदर ” – मैम ने टोकते हुए कहा।

लड़के ने क्लास में प्रवेश किया। कंही जगह नहीं मिलने की वजह से वह प्रेक्षा के पास आकर बैठ गया. प्रेक्षा ने धीरे से कहा – ” तुम्हें नजर नहीं आता।मैं बैठी हूँ यहाँ, तुम कहीं ओर जाकर बैठो”

“हमें तो सब साफ साफ नजर आता हैं इसीलिए यहाँ बैठे, आपकी नज़रें थोड़ी कमजोर है लगता है, इसीलिए आपको नजर नहीं आ रहा कि ओर कहीं भी जगह नहीं है” – लड़के ने जवाब दिया।

प्रेक्षा ने चारों तरफ देखा ओर शांति से बैठ गयी। क्योंकि वास्तव मे कहीं जगह नहीं थी। दोनों ने क्लास ली ओर क्लास के बाद जगह बदल ली।

प्रेक्षा की सहेली उसके पास आकर बैठ गयी ओर वह लड़का अपने मित्रों के पास जाकर बैठ गया।

प्रेक्षा की सहेली जीविका ने कहा – ” ये लड़का कितना बोलता है, पर फिर भी कितना क्यूट है। है ना ”

” क्या, क्या, क्या क्या कहा तूने, ये ओर क्यूट” – प्रेक्षा ने कहा।

” हाँ यार, मुझे तो लगा क्यूट ” – जीविका ने जवाब दिया।

” रहने दे, कहाँ से लगा तुझे ये क्यूट ” – प्रेक्षा ने पूछा।

“इसके बोलने का तरीका कितना अच्छा है “- जीविका ने जवाब दिया।

“आह! यार अब तू उसकी तारीफ मत करने लगना। मैंने देखा कितना क्यूट है। मेरे पास ही बैठा था, इसीलिए कह रही हूँ मत कह उसे क्यूट” – प्रेक्षा ने कहा।

” चल छोड़ उसे, क्लास के बाद कैंटीन चलेंगे” – जीविका ने कहा।

” हम्म! देखते है “- प्रेक्षा ने जवाब दिया।

प्रेक्षा ओर जीविका क्लास के बाद कैंटीन गए। कैंटीन में प्रवेश करने से पहले ही प्रेक्षा ने कहा – ” चल वापिस क्लास में चलते है ”

“ऐसा क्यों कह रही है तू” – जीविका ने पूछा। ” ये तो पहले ही फैसला कर लिया था ना, कैंटीन चलेंगे, अब क्या हुआ ”  – जीविका ने फिर पूछा।

” वो देख सामने, वहीं लड़का बैठा है” – प्रेक्षा ने उसकी ओर इशारा करते हुए कहा।

“अच्छा, अब कैंटीन जाना बंद, क्योंकि वो लड़का बैठा है, कल से क्लास मत लेना ओर परसो से तो कॉलेज आना ही छोड़ देना, क्योंकि वो लड़का तो कॉलेज आयेगा” – जीविका ने गुस्से में जवाब दिया।

फिर कुछ शांत होकर। ” वो तुझे कुछ कह रहा है, नहीं ना । फिर क्यों तू चिढ़ रही है। तू उसे देख ही मत, बस” – जीविका ने प्रेक्षा को समझाया।

फिर दोनों कैंटीन में गए, एक समोसा खाया ओर अपनी क्लास में चले गये। क्लास के बाद दोनों अपने – अपने घर चले गए।

अगले दिन प्रेक्षा कॉलेज सही समय पर पहुँच गयी। प्रेक्षा क्लास की खिड़की से बाहर देख रही थी कि – दरवाजे से आवाज आयी जिसने उसका ध्यान खींच लिया। ये वही लड़का था। “आज फिर लेट आया” – प्रेक्षा ने धीरे से कहा।

” देख, प्रेक्षा –  वो आ गया, वो आ गया ” – जीविका ने प्रेक्षा को चिढ़ाया।

” चुप रह ” – प्रेक्षा ने उसे डांटा।

लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा -” मैम हम अंदर आ जाए ” इससे पहले की वो कुछ ओर बोलता। मैम ने गुस्से में कहा – “नहीं, क्लास से बाहर जाओ, तुम स्पेशल नहीं हो। जिसके लिए मैं  नियम बदल दू। बाहर जाओ”

” हमारी बाइक की टक्कर हो गयी थी” – लड़के ने शिक्षिका को बताया।

” अब एक ओर बहाना, आई सैड गेट आउट ” – शिक्षिका ने कहा।

लड़का चुप चाप वहाँ से जाने लगा। लड़का लंगड़ा रहा था। मैम ने देखा की उसके कपड़ो पर खून लगा था तो उन्हें समझते देर ना लगी कि वह सच बोल रहा था। मैम ने उसे अंदर बुलाया। और पूछा – ” कहाँ चोट लगी हैं” फिर कहा – “डॉक्टर के पास जाओ, इसका कोई भी दोस्त इसके साथ डॉक्टर के पास चला जाए”

“उसकी जरूरत नहीं है मैम, हम होकर आये है, अब हम ठीक है” लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा

मैम ने उसे अंदर आने को कहा ओर वो अंदर आकर बैठ गया। वह प्रेक्षा से आगे वाली सीट पर बैठा था। प्रेक्षा की आदत थी कि – वो पैरो को आगे पीछे करती रहती थी, वो अब भी ऐसा ही कर रही थी कि – उसका पैर उस लड़के के पैर के लगा, तभी वो करहाया –  “आह्ह्”। प्रेक्षा ने माफी मांगी ओर चुप चाप बैठ गयी।

लड़के ने मुस्कुराते हुए  कहा – “कोई बात नहीं”

उसे मुस्कुराते हुए देख कर प्रेक्षा भी मुस्कुराने लगी।

क्लास के बाद जब प्रेक्षा ओर जीविका बाहर निकले तो उस लड़के ने उन्हें रोकते हुए कहा – “सुनो, हैलो! हमारा नाम अभिनव हैं आप हमें अभि भी बोल सकती है। आपसे मिलकर खुशी हुई”

“हैलो, मेरा नाम प्रेक्षा है। मुझे भी आपसे मिलकर खुशी हुई” – प्रेक्षा ने जवाब में कहा ।

“अब तो हम दोस्त बन सकते है ना, क्या आप हमसे दोस्ती करेंगी” – अभिनव ने प्रेक्षा से पूछा।

प्रेक्षा ने कभी किसी लड़के से दोस्ती नहीं की थी। प्रेक्षा को कुछ समझ नहीं आया वो क्या कहे, वो बस तेजी से वहाँ से चली गयी। 

” कोई बात नहीं, आराम से सोचकर बता दीजियेगा कल ” – अभिनव ने पीछे से चिल्लाते हुए कहा। 

क्या प्रेक्षा अभिनव से दोस्ती करेगी? क्या ये दोस्ती प्यार में बदल जाएगी? या दोनों सिर्फ दोस्त ही बन पायेंगे। जानने के लिए, मेरे चैनल से जुड़े रहे ओर अभी फॉलो करें। कॉमेंट करके जरूर बताये स्टोरी कैसी लगी। ताकि मैं नेक्स्ट चैप्टर जल्द ही लाऊ। पोस्ट को देखने के लिए धन्यवाद। 

क्लास के बाद जब प्रेक्षा ओर जीविका बाहर निकले तो उस लड़के ने उन्हें रोकते हुए कहा – “सुनो, हैलो! हमारा नाम अभिनव हैं आप हमें अभि भी बोल सकती है। आपसे मिलकर खुशी हुई”। 

जीविका हैरानी से अभिनव को देख रही थी और सोच रही थी -” अभिनव तू तो गया, प्रेक्षा को लड़के पसंद नहीं है । वो कभी तुझसे बात नहीं करेगी।” 

“हैलो, मेरा नाम प्रेक्षा है। मुझे भी आपसे मिलकर खुशी हुई” – प्रेक्षा ने जवाब में कहा । 

अब जीविका प्रेक्षा को घूर – घूर कर अचंभे से देखने लगी। 

“अब तो हम दोस्त बन सकते है ना, क्या आप हमसे दोस्ती करेंगी” – अभिनव ने प्रेक्षा से पूछा। 

ये सुनकर सिर्फ प्रेक्षा के ही नहीं जीविका के होश भी उड़ गए। अब तो जीविका की हैरानी का ठिकाना न रहा। वह एक टक अभिनव को देखे जा रही थी। 

प्रेक्षा ने कभी किसी लड़के से दोस्ती नहीं की थी। प्रेक्षा को कुछ समझ नहीं आया वो क्या कहे, वो बस तेजी से वहाँ से चली गयी। 

” कोई बात नहीं, आराम से सोचकर बता दीजियेगा कल ” – अभिनव ने पीछे से चिल्लाते हुए कहा। 

प्रेक्षा बिना पीछे मुड़े सीधे – सीधे गेट कॉलेज के गेट की तरफ बढ़ती जा रही थी। वह बहुत तेजी से कॉलेज के गेट की तरफ चली जा रही थी। 

उधर जीविका अभिनव को देख ही रही थी। तभी उसने अपने आपको संभालते हुए प्रेक्षा की तरफ नजर घुमाई तो देखा कि प्रेक्षा वहाँ नहीं थी। उसने मुड़कर देखा तो प्रेक्षा कॉलेज के गेट की तरफ जाती नजर आई। उसने पीछे से प्रेक्षा को आवाज लगाई -” रुक प्रेक्षा, मेरे लिए रुक “और वो  प्रेक्षा की तरफ भागी। वो भागते हुए प्रेक्षा के पास पहुँची और पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा – ” रूक एक मिनट, यार मेरे लिए तो रुक जाती। “

“मैं कॉलेज के गेट के बाहर रुकने ही वाली थी, तेरे लिए ” – प्रेक्षा ने जवाब दिया। 

जीविका ने गर्दन हिलाते हुए हाँ का इशारा किया और दोनों घर की तरफ बढ़ने लगे। 

जीविका चुपचाप प्रेक्षा के साथ – साथ चलने लगी। जीविका जानती थी कि प्रेक्षा परेशान थी इसीलिए उसने प्रेक्षा से कुछ भी पूछना ठीक नहीं समझा। कॉलेज के गेट के बाहर कुछ दूर चलने के बाद दोनों अपने – अपने घर चली गयी। 

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